व्याकरणम्
रविवार, 28 जून 2020
स्वर की महिमा
"
अन्धकारे दीपिकाभिर्गच्छन्न स्खलति क्वचित् ।
एवं स्वरैः प्रणीतानां भवन्त्यर्थाः स्फुटा इति ।।"
(
वेङ्कट माधव)
जैसे अंधकार में मसालों की सहायता से चलता हुआ कहीं ठोकर नहीं खाता । उसी प्रकार स्वरों की सहायता से किए गए अर्थ स्फुट (संदेह रहित) होते हैं ।
योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री
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