रविवार, 28 जून 2020

स्वर की महिमा

"अन्धकारे दीपिकाभिर्गच्छन्न स्खलति क्वचित् ।
एवं स्वरैः प्रणीतानां भवन्त्यर्थाः स्फुटा इति ।।"

जैसे अंधकार में मसालों की सहायता से चलता हुआ कहीं ठोकर नहीं खाता । उसी प्रकार स्वरों की सहायता से किए गए अर्थ स्फुट (संदेह रहित) होते हैं ।